Ethics of Education

Students Counseling
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शिक्षा के नीतिशास्त्र से आषय उन समस्त विचारों, सन्देषों एवं स्लोगनों से है, जो शिक्षा का उद्देष्य प्राप्त करने में सहायक है। शिक्षा का नीतिषास्त्र सामान्य नीतिशास्त्र से पृथक है। सामान्य नीतिशास्त्र में सभी तथ्यों प्रकाष डाला जताा है, जो शिक्षा को भी नीतिगत बनाता है, जबकि शिक्षा का नीतिशास्त्र शिक्षा के माध्यम से समाज में समरसता एवं समग्रता लाता है। इसके अन्तर्गत छात्रों को आदर्षवादी मूल्यों का ज्ञान दिया जाता है। छात्र का आध्यात्मिक एवं आत्मिक विकास किया जाता है। आदर्षवादी एवं नैतिकता से परिपूर्ण समाज की स्थापना करना है, जिससे प्रत्येक व्यक्त्ति समाज में अपना उचित जीवनयापन करने का अधिकार रखे। शिक्षा व्यवस्था को विविध संस्कृतियों का संगम कहा जाता है और प्रत्येक संस्कृति को सम्मान दिया जाता है। आज विविध प्रकार के लोकगीत, लोक नाट्य एवं लोक कलाओं का प्रदर्षन विद्यालय एवं समुदाय में होता है। इनमें अनेक प्रकार के संस्कृति एवं सभ्यता संदेष छिपे होते है।
शिक्षा के नीतिशास्त्र के अन्तर्गत कत्र्तव्यों एवं अधिकारों का व्यापक रूप से वर्णन है। प्राथमिक स्त्तर से छात्रों को शिक्षा अधिकार एवं बाल अधिकार प्रदान कर यह समझाया जाता है कि उसको किस प्रकार अपने अधिकारों को प्राप्त करना है और इन अधिकारों की प्राप्ति के साथ-साथ छात्रों को उनके कत्र्तव्य भी बताये जाते है। इस प्रकार शिक्षा का नीतिशास्त्र नैतिकता, व्यापकता एवं समग्रता के सिद्धान्त पर आधारित है।

Author: Mukesh Kumari