भावनात्मक बुद्धि क्या है ?

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मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज के लोगों के मध्य में रहकर ही वह लोगों का समझता और सीखता है व उनका अनुकरण करता है। जो लोग मानसिक रूप से अस्वस्थ या कमजोर होते हैं उन्हें अपने इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों की भावनाओं को पढ़ने में बहुत दिक्कत होती है। जो लोग मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ होते हैं वे आसानी से दूसरों की भावनाओं को पढ़ पाते हैं क्यों कि उनकी भावनात्मक या सांवेगिक बुद्धि अच्छी होती हैं। सांवेगिक बुद्धि में कुशल बनने के लिए व्यक्ति को दूसरों की बात शान्त मन व मस्तिष्क से सुननी व विचार करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त हम अपने आप को उस व्यक्ति की जगह रखकर विचार करे तो हम उस व्यक्ति के विचारों को और उसकी भावनाओं को आसानी से समझ सकते है। कई बार हमने लोगों को कहते हुए सुना है कि मैंने उसकी फेस रीडिंग की और मैंने पाया कि उसकी बात उसकी आँखों तक नहीं पहुँच रही है यह तरीका भी कई बार दूसरों की भावनाओं को जानने का साधन बन जाता हैं। अतः भावनात्मक बुद्धि प्रधान व्यक्ति में निम्न लक्षण होने चाहिए-

  • भावनात्मक रूप से आत्म-जागरूक होना।
  • संचार कौशल में प्रवीण।
  • यथार्थवादी
  • भविष्य की चिन्ता न करके वर्तमान में रहने वाला।
  •  समस्या का समाधान करने में कुशल
  •  यह पाँच लक्षण जिस व्यक्ति में विद्यमान है वह व्यक्ति भावनात्मक बुद्धि से पूर्ण है।
नलिनी शर्मा