राष्ट्रीय निर्माण में स्वामी विवेकानंद का दृष्टिकोण और नवयुवक उद्यमियों का उदय
स्वामी विवेकानंद का युवाओं पर अटूट विश्वास था। वे यह मानते थे कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके युवाओं के हाथों में होता है। वे युवाओं को केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण की जीवंत शक्ति मानते थे।
उनका प्रसिद्ध कथन — “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” —
आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का अमूल्य मंत्र है।

स्वामी विवेकानंद का युवाओं के प्रति दृष्टिकोण
स्वामी विवेकानंद के अनुसार युवा वही है जिसमें चरित्र, आत्मविश्वास, साहस और सेवा-भाव हो। वे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त युवा चाहते थे।
उनके लिए शिक्षा का अर्थ केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि मनुष्य-निर्माण था — ऐसी शिक्षा जो आत्मबल जगाए और समाज के प्रति उत्तरदायित्व सिखाए।
विवेकानंद के विचारों में युवा समाज की समस्याओं से मुँह मोड़ने वाला नहीं, बल्कि उनके समाधान के लिए आगे बढ़ने वाला कर्मयोगी होता है।
राष्ट्रीय निर्माण में युवाओं की भूमिका
आज का युवा नई सोच, तकनीकी दक्षता और नवाचार की क्षमता से संपन्न है। स्वामी विवेकानंद की दृष्टि में यही युवा राष्ट्र की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रगति का आधार बन सकता है।
जब युवा अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज हित में करता है, तभी सच्चा राष्ट्र निर्माण संभव होता है।
नवयुवक उद्यमियों का उदय
वर्तमान समय में युवा उद्यमियों का उदय स्वामी विवेकानंद के स्वप्न को साकार करता दिखाई देता है। स्टार्टअप संस्कृति, आत्मनिर्भर भारत की सोच और नवाचार आधारित उद्यम युवाओं को रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बना रहे हैं।
ये युवा उद्यमी केवल लाभ कमाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक समस्याओं के समाधान, स्थानीय संसाधनों के विकास
और सतत विकास में भी योगदान दे रहे हैं।
स्वामी विवेकानंद के विचार और आज का युवा उद्यमी
स्वामी विवेकानंद का आत्मविश्वास, साहस और सेवा का संदेश आज के युवा उद्यमियों में स्पष्ट दिखाई देता है। जोखिम उठाने का साहस, असफलता से सीखने की क्षमता और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की भावना — ये सभी गुण विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरित हैं।
अतः स्वामी विवेकानंद की दृष्टि में युवा ही राष्ट्र के सच्चे निर्माता हैं। आज के नवयुवक उद्यमी उनके विचारों को व्यवहार में उतारते हुए भारत को आर्थिक, सामाजिक और नैतिक रूप से सशक्त बना रहे हैं।
यदि युवा विवेकानंद के आदर्शों को अपनाकर आत्मबल, चरित्र और सेवा-भाव के साथ आगे बढ़ें, तो भारत का भविष्य निश्चित ही उज्ज्वल होगा।
—ब्लॉग लेखन:
डॉ. सुनीता कुमारी शर्मा
असिस्टेंट प्रोफेसर
बियानी गर्ल्स बी.एड. कॉलेज, जयपुर
