बचपन की कहानियां और व्यक्तित्व निर्माण
वर्तमान में संयुक्त परिवार बहुत कम हो गए हैं। वर्तमान में एकल परिवार का बोल – बाला है क्योंकि अच्छा रोजगार न मिल पाने के कारण बच्चे जहां अच्छी नौकरी मिलती है वहां जाकर रहने लग जाते हैं। माता – पिता अपने बच्चों को सुखी देखकर ही स्वयं खुश होते रहते हैं। वर्तमान में इतनी...
चरित्र
चरित्र व्यक्ति के नैतिक मूल्यों विश्वासों और शख्सियत से मिलकर बनता है। यह हमारे व्यवहार और कार्यों में झलकता है। इसे दुनिया की बेशुमार दौलत से भी ज्यादा संभाल कर रखने की जरूरत होती है। जीतने के लिए चरित्र का होना जरूरी होता है। जॉर्ज वॉशिंगटन ने कहां है कि” मैं उम्मीद करता हूं कि...
अतिथि देवो भव:
भारत की संस्कृति सत्कार और सेवा की संस्कृति है। भारतीय आध्यात्मिकता की दृष्टि से जब कोई अतिथि बनकर हमारे यहां आता है तो उसके प्रति विनम्रता व शिष्टता तथा उसे सम्मान देना हमारा कर्तव्य बन जाता है। हमारे यहां कहा गया है जो अकेले भोजन करता है वह पाप का भोजन ग्रहण करता है इसलिए...
बड़प्पन का भाव
रामायण में दिखाए गए 1 एपिसोड को देखकर मेरे मन में यहभाव आया किहमें हमेशा सभी के प्रति बड़प्पन का भाव रखना चाहिए !उसे हम इस प्रकार से समझ सकते हैं-कपि राज बाली से भयभीत सुग्रीव किष्किंधा के एक पर्वत की गुफा में जामवंत जी, नल एवं नील के साथ बैठे हुए थे! उनके एक...




