चरित्र

चरित्र व्यक्ति के नैतिक मूल्यों विश्वासों और शख्सियत से मिलकर बनता है। यह हमारे व्यवहार और कार्यों में झलकता है। इसे दुनिया की बेशुमार दौलत से भी ज्यादा संभाल कर रखने की जरूरत होती है। जीतने के लिए चरित्र का होना जरूरी होता है।

 जॉर्ज वॉशिंगटन ने कहां है कि” मैं उम्मीद करता हूं कि मुझमें हमेशा इतनी दृढ़ता और गुण हो कि मैं एक इमानदार आदमी के रूप में जाना जा सकूं, जो मेरे लिए दुनिया के किसी भी महत्वपूर्ण ओहदे से बढ़कर है।”

वोटों से और जनता की राय से नहीं, बल्कि एक लीडर के चरित्र से ही इतिहास की दिशा तय होती है। इमानदारी और असलियत दो रंगी नहीं होती है। सफलता के रास्ते में रास्ते में बहुत से रुकावटें होती हैं, और इन रुकावट को पार करने के लिए चरित्र और बहुत सी मेहनत की जरूरत होती है। लोगों की आलोचनाओं से दिल छोटा ना करने के लिए भी चरित्र की उतनी ही आवश्यकता होती है।

 ऐसा क्यों है कि ज्यादातर लोग सफलता को तो पसंद करते हैं मगर सफल लोगों से नफरत करते हैं। जब भी कोई व्यक्ति आम स्तर से ऊपर उठता है तो कोई ना कोई उसकी टांग खींचने की कोशिश करता है। जब आप किसी व्यक्ति की को पहाड़ की चोटी पर पाते हैं तो स्वभाविक है कि वह चुपके से तो नहीं पहुंचा होगा; उसे एक मुश्किल चढ़ाई जरूर करनी पड़ी होगी ठीक ऐसा ही जिंदगी में भी होता है। किसी भी व्यवसाय में सफल व्यक्ति से बाकी वे लोग ऐसा करते हैं, जो खुद सफल न हो सके। कभी भी आलोचनाओं का शिकार बनकर अपने लक्ष्य से ना भटके। आम आदमी आलोचना से बचने के लिए आसान रास्ता खोजता है, इसलिए न तो वह कुछ कहता है, करता है, और ना ही कभी कुछ बन पाता है। जितना ही आप कामयाब बनेंगे उतना ही आलोचनाओं का शिकार बनने का खतरा बढ़ता है। ऐसा लगता है कि सफलता और आलोचना के बीच में एक गहरा संबंध है जितनी ज्यादा सफलता उतनी ही ज्यादा आलोचना।

आलोचक खुद तो ज्यादा हासिल करते नहीं, लेकिन बाहर बैठकर काम करने वालों पर चिल्लाते हैं कि कैसे काम ठीक से किया जाए। मगर याद रखिए, आलोचक ना तो लीडर है और यही काम करने वाले, और इसलिए बेहतर होगा कि उनसे कहा जाए कि जहां काम हो रहा है, वे लोग वहां आकर काम करके दिखाएं।

 इन सब में सबसे अधिक महत्वपूर्ण तो यह है, कि यदि हमें जीवन में आसमान की ऊंचाइयों को छूना है या सफलता हासिल करना है, तो हमें चरित्रवान बन कर इन सभी आलोचनाओं से ऊपर उठना होगा, और किसी भी प्रकार से इन आलोचनाओं का अपने जीवन पर प्रभाव नहीं पड़ने देना होगा, तभी हम वास्तव में कुछ बन सकते हैं, और जो हमने लक्ष्य निश्चित किया है, उसे हासिल कर सकते हैं।

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