आमतौर पर भारत जैसे देश में जो कि फ़िलहाल विकासशील देशों की श्रेणी में है जहाँ एक निम्न वर्ग के व्यक्ति के लिए दो वक़्त के खाने का इंतज़ाम करना भी मुश्किल सा लगता है, वहाँ वर्तमान समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था में आ रहे उतार चढ़ाव ने भारत देश के न केवल निम्न वर्ग बल्कि सभी वर्गों को प्रभावित किया है और भारतीय अर्थव्यवस्था को कमज़ोर बना दिया है। डॉलर की लगातार बढ़ती क़ीमतें भारतीय रुपये को निरंतर कमज़ोर कर रही है। इस परिप्रेक्ष्य में हम सोने चाँदी जैसी बहुमूल्य धातुओं की लगातार बढ़ती क़ीमतों का भारतीय मध्यम वर्ग पर प्रभाव को जानेंगे।
भारत देश को प्राचीन समय में सोने की चिड़िया कहा जाता था। जहाँ सोने और चाँदी को केवल धातु नहीं माना जाता है, बल्कि यह हमारी संस्कृति,परम्परा और आर्थिक सुरक्षा का एक स्थायी हिस्सा माना जाता है। वर्ष 2026 की शुरुआत में जिस प्रकार से सोने एवं चाँदी की क़ीमतों में लगातार वृद्धि हुई है, उसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से निढाल कर दिया हैं। वर्ष 2026 के शुरुआत में सोने की क़ीमतों ने 1,80000 प्रतिदस ग्राम और चाँदी ने 4,00,000 की प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर को छुआ है और वर्तमान समय में यह निरंतर बढ़ती ही जा रही है। इसने भारतीय समाज के न केवल मध्यम वर्ग को बल्कि सभी वर्गों को गहराई से प्रभावित किया है।

सांस्कृतिक और पारिवारिक संकट
- विवाह का बदलता स्वरूप
भारत में विवाह में सोने एवं चाँदी जैसी क़ीमती धातुओं का भी एक विशिष्ट स्थान होता है। भारत में मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अपनी बेटी के विवाह में स्वर्णाभूषण देना एक सामाजिक मर्यादा है, जो भविष्य में उसकी आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
- बजट का बिगड़ता स्तर
सोने चाँदी की क़ीमतों में होने वाली रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि ने शादी वाले घरों के बजट का गणित बिगाड़ दिया है। जो परिवार पहले विवाह हेतु 50 ग्राम सोना ख़रीदने की योजना बनाते थे, वे अब 25 -30 ग्राम पर ही अपनी योजना को समेट रहे हैं।
- अन्य विकल्पों की तलाश
विवाह एवं अन्य समारोहों में भारी गहनों की जगह अब कम भार वाले गहनों, गोल्ड प्लेटेड आभूषणों एवं चाँदी के आभूषणों का चलन बढ़ रहा है।
- सामाजिक दबाव एवं तनाव
सोने चाँदी की क़ीमतों में लगातार आने वाले उछाल ने भारतीय परिवारों पर वित्तीय बोझ बढ़ाते हुए उनके मानसिक तनाव के स्तर को बढ़ा दिया है।
मध्यम वर्ग एवं बचत की चुनौतियां
भारतीय समाज में गृहणियों के लिए सोने एवं चाँदी के आभूषणों को एक इमरजेंसी फंड की तरह प्रयोग किया जाता है। इन धातुओं की लगातार बढ़ती क़ीमतों ने वर्तमान समय में 2 पहलू सामने रखे हैं।
- सकारात्मक प्रभाव
जिनके पास पहले से ही सोना-चाँदी एवं सोने चाँदी के आभूषण मौजूद हैं उनकी संपत्ति का मूल्य रातोरात बढ़ गया है। यह एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में आज उनके आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
- नकारात्मक प्रभाव
वर्तमान समय में आम जनता के लिए सोने चाँदी में निवेश अब पहुँच से बाहर होता जा रहा है। मध्यम वर्ग के लिए अब बचत के रूप में थोड़ा थोड़ा सोना ख़रीदना मात्र सपना बनता जा रहा है।
अर्थव्यवस्था एवं आम आदमी पर प्रभाव
भारत देश अपनी ज़रूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क़ीमतें बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है, रुपया कमज़ोर होता जा रहा है। रुपये के स्तर में बढ़ती कमज़ोरी ने अंततः पेट्रोल डीज़ल एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की क़ीमतों में क़ीमतें बढ़ाकर आम आदमी की जेब पर असर डाला है।
साथ ही चाँदी का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सौर ऊर्जा के क्षेत्रों में अधिक होने के कारण एवं चाँदी महँगी होने के कारण मोबाइल फ़ोन लैपटॉप और अन्य सोलर पैनल जैसे उपकरणों की लागत बढ़ रही है।
निवेश का बदलता नज़रिया
आधुनिकता के इस दौर में ज़्यादातर जनता का निवेश संबंधी नज़रिया बदलता जा रहा है। अब वे फिजिकल से डिजिटल की ओर बढ़ रहे हैं अर्थात फिजिकल गोल्ड के महँगा होने के कारण अब नागरिकों का रुझान डिजिटल गोल्ड, डिजिटल सिल्वर और ETF की ओर बढ़ रहा है।
रोज़गार एवं सर्राफ़ा बाज़ार पर असर
सर्राफ़ा बाज़ार में हालाँकि ग्राहकों की भीड़ तो है, लेकिन बिक्री के स्तर में गिरावट निरंतर देखी जा रही है जिसके पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर सोने और चाँदी की क़ीमतों में लगातार आ रही वृद्धि एवं अस्थिरता को माना जा रहा है।
गोल्ड लोन का चलन
क़ीमतों में वृद्धि का असर यह भी देखा जा रहा है, कि लोग अपने पुराने सोने पर अब अधिक लोन ले पा रहे हैं, जिससे छोटे व्यापारियों को अपनी पूंजी की ज़रूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है।
निष्कर्ष
सोने और चाँदी की क़ीमतों में यह असामान्य वृद्धि भारतीय नागरिकों के लिए दोहरी तलवार की तरह है, एक तरफ़ तो यह वृद्धि पुराने निवेश पर मोटा मुनाफ़ा दे रही है और दूसरी ओर सामाजिक कर्तव्य और भविष्य की बचत की चुनौतियों को चुनौतीपूर्ण बना रही है। भारत जैसे देश में जहाँ सोना चाँदी भावनाओं से जुड़ा है, वही क़ीमतें चाहे कितनी भी बढ़ जाए लेकिन इसकी चमक कभी कम नहीं होगी।
ब्लॉग लेखन: डॉ.पुष्पा कुमावत
सहायक आचार्य,शिक्षा विभाग
