आज का समय बहुत तेज़ है। मोबाइल की स्क्रीन, नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया और ढेर सारी जानकारियाँ—हमारा दिमाग़ हर पल कुछ-न-कुछ ग्रहण कर रहा है। ऐसे में अगर हम कहें कि “याददाश्त कमज़ोर हो गई है”, तो यह पूरी तरह सच नहीं होता। सच तो यह है कि हमने अपने दिमाग़ को सही तरीक़े से इस्तेमाल करना ही भूल दिया है।
अच्छी स्मृति शक्ति सिर्फ़ टॉपर बनने या परीक्षा पास करने के लिए नहीं होती। यह हमारे आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और रोज़मर्रा के जीवन को आसान बनाने का साधन है। अच्छी बात यह है कि स्मृति कोई ईश्वर का दिया हुआ उपहार नहीं, बल्कि एक ऐसा कौशल है जिसे हर व्यक्ति अभ्यास से विकसित कर सकता है।
स्मृति वास्तव में काम कैसे करती है?
हमारा मस्तिष्क किसी अलमारी की तरह है, जिसमें जानकारी यूँ ही नहीं रखी जाती। स्मृति बनने की प्रक्रिया तीन चरणों में होती है—
- पहला, जानकारी को ध्यान से ग्रहण करना।
- दूसरा, उस जानकारी को दिमाग़ में सुरक्षित रखना।
- और तीसरा, ज़रूरत पड़ने पर उसे याद कर पाना।
अक्सर समस्या याददाश्त की नहीं होती, समस्या होती है हमारी एकाग्रता की। जब हम ध्यान ही नहीं देते, तो दिमाग़ के पास याद रखने के लिए कुछ ठोस होता ही नहीं।

स्मृति शक्ति बढ़ाने के सरल और प्रभावी उपाय
- ध्यान देना सीखिए
याददाश्त की नींव एकाग्रता है। आधा ध्यान किताब पर और आधा मोबाइल पर हो, तो दिमाग़ भ्रमित हो जाता है।
जब भी कुछ पढ़ें या सीखें, खुद से कहिए—“इस पल सिर्फ़ यही मेरा काम है।”
- कल्पना को अपना दोस्त बनाइए
दिमाग़ शब्दों से ज़्यादा तस्वीरों से जुड़ता है।
अगर किसी का नाम याद रखना हो, तो उससे जुड़ी कोई तस्वीर मन में बना लीजिए। यह छोटा-सा खेल याददाश्त को कमाल का बना देता है।
- मज़ेदार तरीक़ों से याद रखिए (Mnemonics)
अगर पढ़ाई बोझ लगने लगे, तो तरीका बदल दीजिए। तुकबंदी, कहानी या छोटे वाक्य बनाकर जानकारी को याद करना आसान हो जाता है।
जब सीखना मज़ेदार होगा, तो याददाश्त अपने-आप बेहतर होगी।
- जानकारी को छोटे हिस्सों में बाँटिए
बहुत सारी बातें एक साथ याद रखने की कोशिश दिमाग़ को थका देती है।
जानकारी को छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँट लीजिए—दिमाग़ इसे सहजता से स्वीकार करता है।
- बार-बार नहीं, सही समय पर दोहराइए
एक ही चीज़ को अलग-अलग दिनों में दोहराने से वह स्थायी स्मृति बन जाती है।
आज सीखा, कल दोहराया, फिर कुछ दिन बाद—बस यही मंत्र है।
- जो सीखें, उसे बाँटिए
जब आप किसी को कुछ समझाते हैं, तो असल में आप खुद ही सबसे ज़्यादा सीखते हैं।
अगर कोई सुनने वाला न हो, तो खुद से बोलकर समझाइए—यह तरीका भी उतना ही असरदार है।
- जीवनशैली को नज़रअंदाज़ न करें
नींद पूरी नहीं होगी, तनाव ज़्यादा होगा, शरीर थका होगा—तो दिमाग़ भी साथ नहीं देगा।
अच्छी नींद, हल्का व्यायाम, संतुलित भोजन और शांत मन—ये सभी अच्छी याददाश्त की नींव हैं।
- माइंड मैपिंग अपनाइए
काग़ज़ पर शब्दों और चित्रों के ज़रिए अपने विचारों को फैलाइए।
यह तरीका दिमाग़ को आज़ादी देता है और याद रखने की शक्ति बढ़ाता है।
रोज़ थोड़ा-सा अभ्यास, बड़ा बदलाव
याददाश्त बढ़ाने के लिए घंटों पढ़ना ज़रूरी नहीं। रोज़ थोड़ी-सी कोशिश—कविता याद करना, नई भाषा सीखना, पहेली हल करना—दिमाग़ को जवान बनाए रखता है।
निष्कर्ष
अच्छी स्मृति का अर्थ सब कुछ याद रखना नहीं, बल्कि सही समय पर सही बात याद आ जाना है। आपका दिमाग़ बहुत शक्तिशाली है—बस उसे प्यार, धैर्य और सही दिशा की ज़रूरत है। खुद पर भरोसा रखिए, अभ्यास करते रहिए—याददाश्त भी आपका साथ ज़रूर देगी।
ब्लॉग लेखन:डॉ.सरिता पारीक
सहायक प्राध्यापक, शिक्षा विभाग
बियानी गर्ल्स बी.एड. महाविद्यालय,जयपुर
