वर्तमान संदर्भ में शांति शिक्षा की भूमिका एवं प्रासंगिकता

वर्तमान युग को यदि परिवर्तन और विरोधाभासों का युग कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। एक ओर विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को सुविधाजनक बनाया है, वहीं दूसरी ओर हिंसा, युद्ध, आतंकवाद, सामाजिक असहिष्णुता, मानसिक तनाव, पर्यावरणीय संकट Read more

कामकाजी महिलाएं और मानसिक स्वास्थ्य

आज की कामकाजी महिला (Working Woman) 21वीं सदी की पहचान बन चुकी है। वह आत्मनिर्भर है, शिक्षित है और समाज की प्रगति में सक्रिय भूमिका निभा रही है। अच्छे B.Ed कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करके महिलाएँ न केवल एक कुशल Read more

बाल विकास और अभिभावक

बच्चों की बढ़ती उम्र से अभिभावक की परेशानी व चिंता बनने लगती है, इसलिए वे उनका ज़रूरत सेज़्यादा ध्यान रखने लगते हैं। चौबीसों घंटे निगरानी रखने के चक्कर में कभी वे उनके कंप्यूटर, तो कभी अलमारी और तो कभी डायरी Read more

राष्ट्रीय निर्माण में स्वामी विवेकानंद का दृष्टिकोण

राष्ट्रीय निर्माण में स्वामी विवेकानंद का दृष्टिकोण और नवयुवक उद्यमियों का उदय स्वामी विवेकानंद का युवाओं पर अटूट विश्वास था। वे यह मानते थे कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके युवाओं के हाथों में होता है। वे युवाओं को Read more

स्मृति शक्ति बढ़ाने के कौशल

आज का समय बहुत तेज़ है। मोबाइल की स्क्रीन, नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया और ढेर सारी जानकारियाँ—हमारा दिमाग़ हर पल कुछ-न-कुछ ग्रहण कर रहा है। ऐसे में अगर हम कहें कि “याददाश्त कमज़ोर हो गई है”, तो यह पूरी तरह सच Read more

21वीं सदी में सशक्त महिला की पहचान

21वीं सदी को परिवर्तन, तकनीक और जागरूकता का युग कहा जाता है। इस सदी में समाज के अनेक आयाम बदले हैं, और इन्हीं बदलावों के बीच महिला की पहचान भी एक नई दिशा में आगे बढ़ी है। आज की महिला Read more

अंधविश्वास और भारतीय सामाजिक जीवन

भारतीय समाज विविधताओं से भरा हुआ है—यहाँ की संस्कृति, परंपराएँ, मान्यताएँ और जीवन-शैली अत्यंत समृद्ध हैं। किंतु इस समृद्धि के साथ-साथ कुछ ऐसी मान्यताएँ भी समाज में गहराई तक जड़ें जमाए हुए हैं, जो वैज्ञानिक दृष्टि से प्रमाणित नहीं हैं, Read more

उपनिषद और आधुनिक शिक्षा

वेद के तीन मुख्य विषय हैं ज्ञान, भक्ति और कर्म। इन तीनों विषयों में से ज्ञान पक्ष का प्रतिपादन उपनिषदों में हुआ है। उपनिषद भारतीय दर्शन, संस्कृति और शिक्षा-परंपरा के आधार स्तंभ माने जाते हैं। ये वैदिक साहित्य का दार्शनिक Read more

नवाचार की सही समझ – समय,धन और ऊर्जा बचाने का व्यावहारिक मार्ग

आज के दौर में “इनोवेशन” शब्द बहुत प्रचलित है। हर संस्था, हर शिक्षक, हर संगठन और यहाँ तक कि हर विद्यार्थी भी कुछ नया करना चाहता है। लेकिन क्या हर नया काम सच में नवाचार होता है? मेरे विचार से Read more