अतिथि देवो भव:
भारत की संस्कृति सत्कार और सेवा की संस्कृति है। भारतीय आध्यात्मिकता की दृष्टि से जब कोई अतिथि बनकर हमारे यहां आता है तो उसके प्रति विनम्रता व शिष्टता तथा उसे सम्मान देना हमारा कर्तव्य बन जाता है। हमारे यहां कहा गया है जो अकेले भोजन करता है वह पाप का भोजन ग्रहण करता है इसलिए...
बड़प्पन का भाव
रामायण में दिखाए गए 1 एपिसोड को देखकर मेरे मन में यहभाव आया किहमें हमेशा सभी के प्रति बड़प्पन का भाव रखना चाहिए !उसे हम इस प्रकार से समझ सकते हैं-कपि राज बाली से भयभीत सुग्रीव किष्किंधा के एक पर्वत की गुफा में जामवंत जी, नल एवं नील के साथ बैठे हुए थे! उनके एक...
कैसे करें ज्ञान की रचना
कल मैंने अपनी उच्च कक्षा के विद्यार्थियों पर एक छोटा सा प्रयोग किया। मैंने सभी विद्यार्थियों को अचानक से पूछा अ से तो सभी विद्यार्थियों का एक साथ जवाब था अनार फिर मैंने पूछा आ से तो सभी ने फिर से जवाब दिया आम मुझे यह देखकर और सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ कि किसी भी...
टी.वी. एवं मोबाइल संस्कृति
टी.वी. और मोबाइल संस्कृति आधुनिक सभ्यता की देन है l मनोरंजन के वर्तमान समय में यह उत्तम साधन है प्राचीन काल में भारत में अनेक मनोरंजन के साधन थे l जैसे रामलीला मंडली, नाटक मंडली, नौटंकी, मदारियों के खेल इत्यादि अनेक मनोरंजन के साधन हुआ करते थे यह सब साधन मानव के लिए ज्ञानवर्धक और...




