गुरु नानक देव का आशीर्वाद वर्तमान परिप्रेक्ष्य में

इस समय जब पूरा विश्व एक महामारी की चपेट में है। सम्पूर्ण विश्व एक सुर में हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी द्वारा इस वैश्विक महामारी को रोकने के लिए दिए गए प्रयासों की एक सुर में सराहना कर रहा हैं, वही हमारे देश में आज भी कुछ लोग उनकी व उनके द्वारा दिए गए प्रयासों की आलोचना कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है| इस संकट की घड़ी में हमारे देश के कुछ लोग अशिक्षा व अत्याधिक धर्म निष्ठा के कारण भी कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए दिए जा रहे उपायों का मजाक उड़ाते नजर आ रहे हैं, साथ ही वह इस प्रकार के संदेश आसपास के लोगों के साथ साझा कर रहे हैं जो कि कोरोना को रोकने के लिए उठाए जा रहे उपायों का मजाक उड़ा रहे हैं। यह हमारे देश के लिए अत्यंत दुखद है। क्योंकि भारत एक सुदृढ़ लोकतांत्रिक राष्ट्र है और यह हम सब नागरिकों का कर्तव्य है कि हम अपने देश की छवि को वैश्विक स्तर पर धूमिल न होने दे। इस संदर्भ में मुझे गुरु नानक द्वारा दी गई आशीर्वाद की सार्थकता महसूस होती है।

यह कहानी कुछ इस प्रकार है, एक बार गुरु नानक देव अपने शिष्यों के साथ एक गांव में पहुंचे, वहां के लोग असभ्य और अशिक्षित थे। वहां के लोगों ने गुरु नानक देव व उनके शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया, जब गुरु नानक देव वहां से जाने लगे तो उन्होंने वहां के लोगों को आशीर्वाद दिया “बसे रहो” । फिर आगे दोबारा अपने शिष्यों के साथ दूसरे गांव में गए, वहां के लोग सभ्य, सुशिक्षित, सज्जन व सेवाभावी थे। उन्होंने गुरु नानक देव  और उनके शिष्यों की बहुत आवभगत व अतिथि सत्कार किया। जब गुरु नानक देव गांव से जाने लगे तो उन्होंने लोगों को आशीर्वाद दिया “उजड़ जाओ”। उनके शिष्य अपने गुरु के इस व्यवहार पर बहुत अचंभित हुए और उन्होंने इसका कारण अपने गुरु से पूछा, तब गुरु नानक ने उनको इसका रहस्य बताते हुए कहा “मैंने असभ्य अशिक्षित लोगों को बसे रहने का आशीर्वाद इसलिए दिया ताकि वह लोग अपने अवगुणों और विचारों को और ना फैलाएं बल्कि वही रहे ,जबकि सभ्य शिक्षित लोगों को उजड़ने का आशीर्वाद इसलिए दिया क्योकि वह सभ्य शिक्षित लोग चारों ओर फैल कर अपनी सज्जनता व संस्कारों का प्रकाश चारों ओर फैलाएंगे।

आज हमें भी उन्हीं की भांति कार्य करके, ऐसे लोग जो देश की न्याय और कानून व्यवस्था खराब कर रहे हैं और सामाजिक रूप से धर्म के नाम पर हमारे देश को बांटने का प्रयत्न कर रहे हैं उन्हें एक निश्चित सीमा तक रोक देना चाहिए ताकि हम इस वैश्विक संकट के दौर में एकजुट होकर संपूर्ण राष्ट्र की तरह खड़े होकर इस वैश्विक महामारी का सामना कर सके और  इस महामारी पर विजय प्राप्त कर सकें। इस तरह भारत एक बार पुनः महान शक्ति के रूप में अपना नाम विश्व पटल पर अंकित कर पाएगा ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है।

संकेत शब्द: गुरुनानक, वैश्विक महामारी , आशीर्वाद, कोरोना संक्रमण

Blog By :  Dr. Ekta Pareek (Principal)

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